vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना
»
श्लोक 12
श्लोक
13.44.12
ततो विपुलमानाय्य देवशर्मा महातपा:।
पुष्पार्थे चोदयामास गच्छ गच्छेति भारत॥ १२॥
अनुवाद
भरत! तब महातपस्वी देवशर्मा ने विपुल को बुलाकर पुष्प लाने की आज्ञा दी और कहा - 'जाओ, जाओ'॥12॥
Bharata! Then the great ascetic Deva Sharma called Vipul and ordered him to bring flowers and said, 'Go, go'.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×