श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.44.12 
ततो विपुलमानाय्य देवशर्मा महातपा:।
पुष्पार्थे चोदयामास गच्छ गच्छेति भारत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भरत! तब महातपस्वी देवशर्मा ने विपुल को बुलाकर पुष्प लाने की आज्ञा दी और कहा - 'जाओ, जाओ'॥12॥
 
Bharata! Then the great ascetic Deva Sharma called Vipul and ordered him to bring flowers and said, 'Go, go'.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)