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mahabharat 13.44.11: आश्रम लौटकर सुन्दर मुख वाली रुचि ने अपने गुरु को अपनी बहन की सारी बातें बताईं। उसकी बात सुनकर ऋषि ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली।   |   mahabharat अध्याय 13.44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.44.11 
सा भर्त्रे सर्वमाचष्ट रुचि: सुरुचिरानना।
भगिन्या भाषितं सर्वमृषिस्तच्चाभ्यनन्दत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
आश्रम लौटकर सुन्दर मुख वाली रुचि ने अपने गुरु को अपनी बहन की सारी बातें बताईं। उसकी बात सुनकर ऋषि ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली।
 
On returning to the hermitage, the beautiful-faced Ruchi told her master everything that her sister had said. After listening to her, the sage accepted her request.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)