श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 44: विपुलका गुरुकी आज्ञासे दिव्य पुष्प लाकर उन्हें देना और अपने द्वारा किये गये दुष्कर्मका स्मरण करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.44.1 
भीष्म उवाच
विपुलस्त्वकरोत् तीव्रं तप: कृत्वा गुरोर्वच:।
तपोयुक्तमथात्मानममन्यत स वीर्यवान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! विपुल ने गुरु की आज्ञा मानकर अत्यन्त कठोर तप किया। इससे उसकी शक्ति बहुत बढ़ गई और वह अपने को महान तपस्वी मानने लगा॥1॥
 
Bhishmaji says - King! Vipul followed the orders of his Guru and performed very rigorous penance. This increased his power a lot and he started considering himself a great ascetic.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)