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श्लोक 13.43.8  |
क्लिश्यमानमनङ्गेन त्वत्संकल्पभवेन ह।
तत् सम्प्राप्तं हि मां सुभ्रु पुरा कालोऽतिवर्तते॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| तुम्हारा चिन्तन करने से मेरे हृदय में जो काम उत्पन्न हुआ है, वह मुझे अत्यन्त दुःख दे रहा है। इसीलिए मैं तुम्हारे पास आया हूँ। हे सुन्दरी! अब विलम्ब न करो, समय बीतता जा रहा है।॥8॥ |
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| The lust that has arisen in my heart by thinking of you is causing me great pain. That is why I have come to you. Beautiful lady! Do not delay now, time is passing by.'॥ 8॥ |
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