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mahabharat 13.43.7: तब देवराज इन्द्र ने अत्यंत मधुर वाणी में उन्हें समझाया, 'हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! मुझे देवताओं का राजा इन्द्र ही समझो! मैं तुम्हारे लिए ही यहाँ आया हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.43.7 
तामाबभाषे देवेन्द्र: साम्ना परमवल्गुना।
त्वदर्थमागतं विद्धि देवेन्द्रं मां शुचिस्मिते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब देवराज इन्द्र ने अत्यंत मधुर वाणी में उन्हें समझाया, 'हे निर्मल मुस्कान वाली देवी! मुझे देवताओं का राजा इन्द्र ही समझो! मैं तुम्हारे लिए ही यहाँ आया हूँ।'
 
Then Devraj Indra explained to her in a very sweet voice, 'O Goddess with a pure smile! Consider me as the King of the Gods, Indra! I have come here only for you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)