Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.43.4: दूसरी ओर भरे हुए नितम्बों और भरे हुए स्तनों वाली, खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान बड़े-बड़े नेत्रों वाली तथा पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर नेत्रों वाली रुचि बैठी हुई दिखाई दे रही थी॥4॥ | mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रुचिं च रुचिरापाङ्गीं पीनश्रोणिपयोधराम्।
पद्मपत्रविशालाक्षीं सम्पूर्णेन्दुनिभाननाम्॥ ४॥
अनुवाद
दूसरी ओर भरे हुए नितम्बों और भरे हुए स्तनों वाली, खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान बड़े-बड़े नेत्रों वाली तथा पूर्ण चन्द्रमा के समान मनोहर नेत्रों वाली रुचि बैठी हुई दिखाई दे रही थी॥4॥
On the other side was seen sitting Ruchi with plump buttocks and plump breasts, large eyes like the blossomed lotus petals and a charming gaze with full moon-like eyes. ॥4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥