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mahabharat 13.43.36: महातपस्वी देवशर्मा भी बल और वृत्रासुर को मारने वाले इन्द्र से निर्भय होकर अपनी पत्नी सहित उस निर्जन वन में विचरण करने लगे॥36॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.43.36 
तथैव देवशर्मापि सभार्य: स महातपा:।
निर्भयो बलवृत्रघ्नाच्चचार विजने वने॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महातपस्वी देवशर्मा भी बल और वृत्रासुर को मारने वाले इन्द्र से निर्भय होकर अपनी पत्नी सहित उस निर्जन वन में विचरण करने लगे॥36॥
 
The great ascetic Devsharma also started wandering in that deserted forest along with his wife, fearless from Indra, who killed Bal and Vritrasura. 36॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विपुलोपाख्याने एकचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विपुलका उपाख्यानविषयक

इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४१॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)