Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.43.32: यह सुनकर महाबली ऋषि देवशर्मा विपुल के चरित्र, सदाचार, तपस्या और अनुशासन से अत्यंत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.43.32 
तत् श्रुत्वा स मुनिस्तुष्टो विपुलस्य प्रतापवान्।
बभूव शीलवृत्ताभ्यां तपसा नियमेन च॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर महाबली ऋषि देवशर्मा विपुल के चरित्र, सदाचार, तपस्या और अनुशासन से अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
On hearing this, the mighty sage Deva Sharma was extremely pleased with Vipul's character, good conduct, austerity and discipline.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)