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mahabharat 13.43.31: जब गुरुजी विश्राम करके अपनी पत्नी के साथ बैठे तो विपुला ने उन्हें इंद्र के सारे दुष्कर्मों के बारे में बताया।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.43.31 
विश्रान्ताय ततस्तस्मै सहासीनाय भार्यया।
निवेदयामास तदा विपुल: शक्रकर्म तत् ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जब गुरुजी विश्राम करके अपनी पत्नी के साथ बैठे तो विपुला ने उन्हें इंद्र के सारे दुष्कर्मों के बारे में बताया।
 
When the Guruji rested and sat with his wife, Vipula told him about all the misdeeds of Indra. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)