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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.43.3 
स ददर्श तमासीनं विपुलस्य कलेवरम्।
निश्चेष्टं स्तब्धनयनं यथा लेख्यगतं तथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि विपुल का शरीर चित्र की भाँति निश्चल पड़ा है और उसकी आँखें स्थिर हैं।
 
Reaching there he saw that Vipul's body was lying motionless like a painting and his eyes were fixed. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)