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mahabharat 13.43.29: महाराज! गुरु के आगमन पर विपुल ने, जो अपना प्रिय कार्य कर रहा था, अपनी धर्मपरायण एवं पतिव्रता पत्नी रुचि को, जिसकी उसने रक्षा की थी, उन्हें सौंप दिया।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.43.29 
आगतेऽथ गुरौ राजन् विपुल: प्रियकर्मकृत् ।
रक्षितां गुरवे भार्यां न्यवेदयदनिन्दिताम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! गुरु के आगमन पर विपुल ने, जो अपना प्रिय कार्य कर रहा था, अपनी धर्मपरायण एवं पतिव्रता पत्नी रुचि को, जिसकी उसने रक्षा की थी, उन्हें सौंप दिया।
 
King! On the arrival of the Guru, Vipul, who was doing his favourite work, handed over to him his virtuous and faithful wife Ruchi, who had been protected by him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)