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mahabharat 13.43.28: उनके प्रस्थान के बाद अभी कुछ ही क्षण बीते थे कि महातपस्वी देवशर्मा उनकी इच्छानुसार यज्ञ सम्पन्न करके अपने आश्रम को लौट आये।   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.43.28 
मुहूर्तयाते तस्मिंस्तु देवशर्मा महातपा:।
कृत्वा यज्ञं यथाकाममाजगाम स्वमाश्रमम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उनके प्रस्थान के बाद अभी कुछ ही क्षण बीते थे कि महातपस्वी देवशर्मा उनकी इच्छानुसार यज्ञ सम्पन्न करके अपने आश्रम को लौट आये।
 
Only a moment had passed since his departure when the great ascetic Deva Sharma, having completed the yajna as per his wish, returned to his hermitage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)