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mahabharat 13.43.23: हे मूर्ख इन्द्र! मैं अपने तेज से तुझे भस्म कर सकता हूँ। केवल दयावश मैं इस समय तुझे जलाना नहीं चाहता।॥23॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.43.23 
नाहं त्वामद्य मूढात्मन् दहेयं हि स्वतेजसा।
कृपायमानस्तु न ते दग्धुमिच्छामि वासव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख इन्द्र! मैं अपने तेज से तुझे भस्म कर सकता हूँ। केवल दयावश मैं इस समय तुझे जलाना नहीं चाहता।॥23॥
 
Foolish Indra! I can burn you to ashes with my brilliance. Just out of pity, I do not want to burn you at this time.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)