श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.43.22 
जाने त्वां बालिशमतिमकृतात्मानमस्थिरम्।
ममेयं रक्ष्यते मूढ गच्छ पाप यथागतम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैं जानता हूँ कि तू मूर्ख है, तेरा मन वश में नहीं है और तू बहुत चंचल है। हे पापी मूर्ख! यह स्त्री मेरी रक्षा में है। जिस रास्ते से आई थी, उसी रास्ते से वापस चली जा।
 
I know that you are a fool, your mind is not under control and you are very fickle. You sinful fool! This woman is protected by me. Go back the same way you came.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)