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श्लोक 13.43.14  |
स तां वाचं गुरो: पत्न्या विपुल: पर्यवर्तयत्।
भो: किमागमने कृत्यमिति तस्यास्तु नि:सृता॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| यह देखकर विपुल ने गुरुपत्नी के कहने के शब्द बदल दिए और अचानक उसके मुख से निकला - 'अरे! आपके यहाँ आने का क्या प्रयोजन है?'॥14॥ |
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| Seeing this, Vipul changed the words that Guru's wife wanted to say. Suddenly it came out of his mouth - 'Oh! What is the purpose of your coming here?'॥ 14॥ |
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