Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.43.12-13: उसने गुरुपत्नी रुचि की समस्त इन्द्रियों को योगबन्धनों से बाँध लिया था। राजन! योगबल से मोहित, काम और विकारों से रहित रुचि को देखकर शचीपति इन्द्र लज्जित हो गए और फिर उससे बोले - 'सुन्दरी! आओ, आओ।' उनकी पुकार सुनकर वह पुनः उन्हें कुछ उत्तर देने की इच्छा करने लगी। 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 13.43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 43: विपुलका देवराज इन्द्रसे गुरुपत्नीको बचाना और गुरुसे वरदान प्राप्त करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.43.12-13 
बबन्ध योगबन्धैश्च तस्या: सर्वेन्द्रियाणि स:।
तां निर्विकारां दृष्ट्वा तु पुनरेव शचीपति:॥ १२॥
उवाच व्रीडितो राजंस्तां योगबलमोहिताम्।
एह्येहीति तत: सा तु प्रतिवक्तुमियेष तम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसने गुरुपत्नी रुचि की समस्त इन्द्रियों को योगबन्धनों से बाँध लिया था। राजन! योगबल से मोहित, काम और विकारों से रहित रुचि को देखकर शचीपति इन्द्र लज्जित हो गए और फिर उससे बोले - 'सुन्दरी! आओ, आओ।' उनकी पुकार सुनकर वह पुनः उन्हें कुछ उत्तर देने की इच्छा करने लगी। 12-13॥
 
He had tied all the senses of Guru's wife Ruchhi with yoga-related bonds. Rajan! Seeing Ruchi, fascinated by the power of yoga, devoid of lust and vices, Sachipati Indra became ashamed and then said to her – 'Beautiful! Come, come.' Hearing his appeal, she again started wishing to give him some answer. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)