Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.42.d2: जिनका मन किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं है, जिन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन करके अपने अंतःकरण को शुद्ध कर लिया है, तथा जो तप, संयम और ध्यान-उपासना में लगे रहते हैं, केवल वे ही परम पवित्रता को प्राप्त करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिनका मन किसी भी वस्तु में आसक्त नहीं है, जिन्होंने ब्रह्मचर्य का पालन करके अपने अंतःकरण को शुद्ध कर लिया है, तथा जो तप, संयम और ध्यान-उपासना में लगे रहते हैं, केवल वे ही परम पवित्रता को प्राप्त करते हैं।
Those whose minds are not attached to anything, who have purified their inner beings by observing celibacy, and who are engaged in austerity, self-control and meditation-worship, they alone attain supreme purity.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥