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mahabharat 13.42.d1: ब्राह्मण, गुरु, महान गुरु और राजा - इन सभी को स्त्री के साथ अस्थायी संबंध के कारण वासना की यातनाएं सहनी पड़ती हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.42.d1 
(द्विजानां च गुरूणां च महागुरुनृपादिनाम्।
क्षणात् स्त्रीसङ्गकामोत्था यातनाहो निरन्तरा॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण, गुरु, महान गुरु और राजा - इन सभी को स्त्री के साथ अस्थायी संबंध के कारण वासना की यातनाएं सहनी पड़ती हैं।
 
A Brahmin, a Guru, a great Guru and a King - all of them have to suffer the tortures of lust due to the temporary association with a woman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)