श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.42.60 
यं कालं नागतो राजन् गुरुस्तस्य महात्मन:।
क्रतुं समाप्य स्वगृहं तं कालं सोऽभ्यरक्षत॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! जब तक महात्मा विपुल के गुरु यज्ञ पूर्ण करके घर नहीं लौट आये, तब तक विपुल इसी प्रकार अपने गुरु की पत्नी की रक्षा करते रहे ॥60॥
 
King! Until Mahatma Vipul's Guru returned home after completing the Yagya, Vipul continued to protect his Guru's wife in this manner. 60॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विपुलोपाख्याने चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विपुलका उपाख्यानविषयक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ६२ श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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