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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  13.42.6-7h 
अथाभ्यगच्छन् देवास्ते पितामहमरिंदम॥ ६॥
निवेद्य मानसं चापि तूष्णीमासन्नधोमुखा:।
 
 
अनुवाद
शत्रुनाशक! तब देवता ब्रह्माजी के पास गए और उनसे अपना विचार कहकर, सिर झुकाकर चुपचाप बैठ गए।
 
Enemy-destroyer! Then the gods went to Brahmaji and after telling him their thoughts, sat quietly with their heads down. 6 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)