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mahabharat 13.42.59: विपुल गुरु ने अपनी पत्नी के शरीर को सुरक्षित रखवा लिया और वहीं रहने लगे, लेकिन रुचि को उनके शरीर में आने का पता नहीं चला।   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.42.59 
ततो विष्टभ्य विपुलो गुरुपत्न्या: कलेवरम्।
उवास रक्षणे युक्तो न च सा तमबुद्‍ध्यत॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
विपुल गुरु ने अपनी पत्नी के शरीर को सुरक्षित रखवा लिया और वहीं रहने लगे, लेकिन रुचि को उनके शरीर में आने का पता नहीं चला।
 
Vipul Guru got his wife's body preserved and started residing there. But Ruchi did not know about his arrival in her body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)