Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.42.54-55: पृथ्वीनाथ! इस प्रकार धर्म को देखते हुए, सम्पूर्ण वेदों और शास्त्रों का विचार करते हुए, अपने तथा अपने गुरु के द्वारा की गई घोर तपस्या को ध्यान में रखते हुए भृगुवंशी विपुल ने अपने गुरु की पत्नी की रक्षा के लिए उपर्युक्त उपाय करने का मन में निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने जो महान् प्रयास किए, उन्हें मैं आपसे कहता हूँ, सुनिए - ॥54-55॥ | mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वीनाथ! इस प्रकार धर्म को देखते हुए, सम्पूर्ण वेदों और शास्त्रों का विचार करते हुए, अपने तथा अपने गुरु के द्वारा की गई घोर तपस्या को ध्यान में रखते हुए भृगुवंशी विपुल ने अपने गुरु की पत्नी की रक्षा के लिए उपर्युक्त उपाय करने का मन में निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने जो महान् प्रयास किए, उन्हें मैं आपसे कहता हूँ, सुनिए - ॥54-55॥
Prithvinath! In this way, looking at the religion, considering the entire Vedas and scriptures, keeping in mind the immense penance done by him and his Guru, Bhriguvanshi Vipul decided in his mind to take the above mentioned measures for the protection of his Guru's wife and I will tell you about the great efforts he made for this, listen - ॥ 54-55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥