Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.42.45-46: अथवा मैं अपने प्रयत्नों से इसकी रक्षा नहीं कर सकता; क्योंकि धन से संपन्न इन्द्र बहुमुखी पुरुष माना जाता है। अतः मैं योगबल का आश्रय लेकर ही इन्द्र से इसकी रक्षा करूँगा॥ 45-46॥ | mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथवा पौरुषेणेयं न शक्या रक्षितुं मया॥ ४५॥
बहुरूपो हि भगवान् श्रूयते पाकशासन:।
सोऽहं योगबलादेनां रक्षिष्ये पाकशासनात्॥ ४६॥
अनुवाद
अथवा मैं अपने प्रयत्नों से इसकी रक्षा नहीं कर सकता; क्योंकि धन से संपन्न इन्द्र बहुमुखी पुरुष माना जाता है। अतः मैं योगबल का आश्रय लेकर ही इन्द्र से इसकी रक्षा करूँगा॥ 45-46॥
‘Or I cannot protect it by my efforts; because Indra, the one who is endowed with wealth, is known to be a multi-faceted person. Therefore, I will protect it from Indra only by taking recourse to the power of yoga.॥ 45-46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥