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mahabharat 13.42.44-45h: सम्भव है कि इन्द्र वायु रूप में आकर उसकी पत्नी को भ्रष्ट कर दें; इसलिए आज मैं रुचि के शरीर में प्रवेश करके वहाँ निवास करूँगा ॥44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  13.42.44-45h 
वायुरूपेण वा शक्रो गुरुपत्नीं प्रधर्षयेत्॥ ४४॥
तस्मादिमां सम्प्रविश्य रुचिं स्थास्येऽहमद्य वै।
 
 
अनुवाद
सम्भव है कि इन्द्र वायु रूप में आकर उसकी पत्नी को भ्रष्ट कर दें; इसलिए आज मैं रुचि के शरीर में प्रवेश करके वहाँ निवास करूँगा ॥44 1/2॥
 
It is possible that Indra may come in the form of Vayu and corrupt his wife; That's why today I will enter Ruchi's body and live there. 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)