Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.42.36-37: वे मक्खी-मच्छर आदि का भी रूप धारण करते हैं । विपुल! उन्हें कोई नहीं पकड़ सकता । हे प्रिये! औरों का क्या ? इस जगत् को बनानेवाले विधाता भी उन्हें वश में नहीं कर सकते । लुप्त होने के बाद इन्द्र केवल ज्ञानचक्षुओं से ही दिखाई देते हैं ॥36-37॥ | mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे मक्खी-मच्छर आदि का भी रूप धारण करते हैं । विपुल! उन्हें कोई नहीं पकड़ सकता । हे प्रिये! औरों का क्या ? इस जगत् को बनानेवाले विधाता भी उन्हें वश में नहीं कर सकते । लुप्त होने के बाद इन्द्र केवल ज्ञानचक्षुओं से ही दिखाई देते हैं ॥36-37॥
They also assume the form of flies and mosquitoes etc. Vipul! No one can catch them. O dear! What about others? Even the Creator who created this world cannot control them. After disappearing, Indra is visible only through the eye of knowledge. ॥36-37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥