Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.42.29-30: बेटा! कभी वह सिर पर मुकुट, कानों में कुण्डल, हाथ में वज्र और धनुष धारण किए हुए आता है, तो कभी उसी क्षण चाण्डाल के समान दिखाई देता है; तो कभी वह जटाधारी, जटाधारी और वस्त्रधारी ऋषि बन जाता है। | mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बेटा! कभी वह सिर पर मुकुट, कानों में कुण्डल, हाथ में वज्र और धनुष धारण किए हुए आता है, तो कभी उसी क्षण चाण्डाल के समान दिखाई देता है; तो कभी वह जटाधारी, जटाधारी और वस्त्रधारी ऋषि बन जाता है।
Son! Sometimes he comes with a crown on his head, earrings in his ears, a thunderbolt and a bow in his hands, and sometimes he appears like a Chandala for the same moment; then sometimes he becomes a sage with a tuft of hair, matted hair and a robe.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥