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mahabharat 13.42.28: देवशर्मा बोले- ब्रह्मर्षे! भगवान् पक्षासन इन्द्र अनेक मायाओं के ज्ञाता हैं। वे बार-बार अनेक रूप धारण करते रहते हैं। 28॥   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.42.28 
देवशर्मोवाच
बहुमाय: स विप्रर्षे भगवान‍् पाकशासन:।
तांस्तान् विकुरुते भावान् बहूनथ मुहुर्मुहु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
देवशर्मा बोले- ब्रह्मर्षे! भगवान् पक्षासन इन्द्र अनेक मायाओं के ज्ञाता हैं। वे बार-बार अनेक रूप धारण करते रहते हैं। 28॥
 
Devsharma said – Brahmarshe! Lord Pakshasan Indra is knowledgeable of many illusions. They keep changing many forms again and again. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)