श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.42.26 
विपुल उवाच
कानि रूपाणि शक्रस्य भवन्त्यागच्छतो मुने।
वपुस्तेजश्च कीदृग् वै तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
विपुल ने पूछा - मुनि ! जब इन्द्र आते हैं, तब उनके कौन-कौन से रूप होते हैं, उस समय उनका शरीर और तेज कैसा होता है ? कृपा करके मुझे यह स्पष्ट रूप से बताइए ॥ 26॥
 
Vipul asked - Muni! When Indra comes, what are his various forms and what is his body and radiance like at that time? Kindly tell me this clearly.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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