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श्लोक 13.42.26  |
विपुल उवाच
कानि रूपाणि शक्रस्य भवन्त्यागच्छतो मुने।
वपुस्तेजश्च कीदृग् वै तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| विपुल ने पूछा - मुनि ! जब इन्द्र आते हैं, तब उनके कौन-कौन से रूप होते हैं, उस समय उनका शरीर और तेज कैसा होता है ? कृपा करके मुझे यह स्पष्ट रूप से बताइए ॥ 26॥ |
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| Vipul asked - Muni! When Indra comes, what are his various forms and what is his body and radiance like at that time? Kindly tell me this clearly.॥ 26॥ |
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