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mahabharat 13.42.22-23h: देवशर्मा बोले - वत्स! मैं यज्ञ करने जा रहा हूँ। तुम मेरी इस पत्नी रुचि की यत्नपूर्वक रक्षा करो; क्योंकि देवराज इन्द्र सदैव इसकी प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  13.42.22-23h 
देवशर्मोवाच
यज्ञकारो गमिष्यामि रुचिं चेमां सुरेश्वर:॥ २२॥
यत: प्रार्थयते नित्यं तां रक्षस्व यथाबलम्।
 
 
अनुवाद
देवशर्मा बोले - वत्स! मैं यज्ञ करने जा रहा हूँ। तुम मेरी इस पत्नी रुचि की यत्नपूर्वक रक्षा करो; क्योंकि देवराज इन्द्र सदैव इसकी प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। 22 1/2॥
 
Devsharma said – Vatsa! I will go to perform the yagya. You protect this wife of mine, Ruchhi, diligently; Because Devraj Indra is always trying to achieve it. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)