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mahabharat 13.42.18-19h: महामुनि देवशर्मा स्त्रियों के चरित्र को जानते थे; इसलिए उन्होंने यथाशक्ति उत्साहपूर्वक उसकी रक्षा की।   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  13.42.18-19h 
नारीणां चरितज्ञश्च देवशर्मा महामुनि:॥ १८॥
यथाशक्ति यथोत्साहं भार्यां तामभ्यरक्षत।
 
 
अनुवाद
महामुनि देवशर्मा स्त्रियों के चरित्र को जानते थे; इसलिए उन्होंने यथाशक्ति उत्साहपूर्वक उसकी रक्षा की।
 
Mahamuni Devsharma knew the character of women; Therefore, they protected him as enthusiastically as they could.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)