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mahabharat 13.42.16-17h: एक समय की बात है, देवशर्मा नाम के एक बड़े भाग्यवान ऋषि थे। इस पृथ्वी पर अद्वितीय सुन्दरी रुचि नाम की एक स्त्री थी। 16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  13.42.16-17h 
ऋषिरासीन्महाभागो देवशर्मेति विश्रुत:॥ १६॥
तस्य भार्या रुचिर्नाम रूपेणासदृशी भुवि।
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, देवशर्मा नाम के एक बड़े भाग्यवान ऋषि थे। इस पृथ्वी पर अद्वितीय सुन्दरी रुचि नाम की एक स्त्री थी। 16 1/2॥
 
Once upon a time, there was a very fortunate sage named Devsharma. There was a woman named Ruchi who was a unique beauty on this earth. 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)