Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.42.14-15h: स्त्रियों की रक्षा शब्दों से, उन्हें मारकर, बाँधकर अथवा नाना प्रकार के कष्ट देकर नहीं की जा सकती; क्योंकि वे सदैव अनुशासनहीन रहती हैं ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  13.42.14-15h 
वाचा च वधबन्धैर्वा क्लेशैर्वा विविधैस्तथा॥ १४॥
न शक्या रक्षितुं नार्यस्ता हि नित्यमसंयता:।
 
 
अनुवाद
स्त्रियों की रक्षा शब्दों से, उन्हें मारकर, बाँधकर अथवा नाना प्रकार के कष्ट देकर नहीं की जा सकती; क्योंकि वे सदैव अनुशासनहीन रहती हैं ॥14 1/2॥
 
Women cannot be protected by words, by stopping them through killing or binding them, or by giving them various kinds of troubles; because they are always undisciplined. ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)