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mahabharat 13.42.13-14h: पिताश्री! जगत के रचयिता ब्रह्मा जैसे पुरुष भी स्त्रियों की किसी प्रकार रक्षा नहीं कर सकते, फिर साधारण पुरुषों की तो बात ही क्या है?   |   mahabharat अध्याय 13.42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 42: भृगुवंशी विपुलके द्वारा योगबलसे गुरुपत्नीके शरीरमें प्रवेश करके उसकी रक्षा करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  13.42.13-14h 
न तासां रक्षणं शक्यं कर्तुं पुंसां कथंचन॥ १३॥
अपि विश्वकृता तात कुतस्तु पुरुषैरिह।
 
 
अनुवाद
पिताश्री! जगत के रचयिता ब्रह्मा जैसे पुरुष भी स्त्रियों की किसी प्रकार रक्षा नहीं कर सकते, फिर साधारण पुरुषों की तो बात ही क्या है?
 
Father! Even a man like Brahma, the creator of the world, cannot protect women in any way, then what to say about ordinary men. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)