श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 41: स्त्रियोंकी रक्षाके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  13.41.8-9h 
उशना वेद यच्छास्त्रं यच्च वेद बृहस्पति:॥ ८॥
स्त्रीबुद्‍ध्या न विशिष्येत तास्तु रक्ष्या: कथं नरै:।
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य और बृहस्पति जिस नीतिशास्त्र को जानते हैं, वह स्त्री की बुद्धि से श्रेष्ठ नहीं है। ऐसी स्त्रियों की रक्षा पुरुष कैसे कर सकते हैं? 8 1/2
 
The ethics which Shukracharya knows and Brihaspati knows are not better than the intelligence of a woman. How can men protect such women? 8 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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