vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 41: स्त्रियोंकी रक्षाके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न
»
श्लोक 5
श्लोक
13.41.5
एता हि रममाणास्तु वञ्चयन्तीह मानवान्।
न चासां मुच्यते कश्चित् पुरुषो हस्तमागत:॥ ५॥
अनुवाद
यहाँ तो वह मैथुन करते हुए भी पुरुषों को धोखा देती रहती है। जो भी पुरुष उसके हाथ में आ जाता है, वह उससे बच नहीं सकता।॥5॥
Even while having sexual relations, she keeps deceiving men here. Any man who comes in her hands cannot escape from her. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×