श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 41: स्त्रियोंकी रक्षाके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.41.4 
इति ता: पुरुषव्याघ्र कथं शक्यास्तु रक्षितुम्।
प्रमदा: पुरुषेणेह तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! यौवन से उन्मत्त स्त्रियों की रक्षा पुरुष किस प्रकार कर सकता है? कृपया मुझे विस्तारपूर्वक बताइये।
 
Purushsingh! How can a man protect women who are mad with youth? Please tell me this in detail.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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