श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 41: स्त्रियोंकी रक्षाके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.41.3 
कथमासां नरा: सङ्गं कुर्वते कुरुनन्दन।
स्त्रियो वा केषु रज्यन्ते विरज्यन्ते च ता: पुन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! पुरुष इन स्त्रियों के साथ क्यों रहते हैं? अथवा स्त्रियाँ पुरुषों के प्रति आसक्त और द्वेषी क्यों होती हैं? ॥3॥
 
O son of Kuru! Why do men associate with these women? Or why do women become attached to and averse to men? ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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