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श्लोक 13.41.14  |
तथा ब्रूहि महाभाग कुरूणां वंशवर्धन।
यदि शक्या कुरुश्रेष्ठ रक्षा तासां कदाचन॥
कर्तुं वा कृतपूर्वं वा तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| हे महामुनि! हे कुरुवंश के स्वामी! कुरुश्रेष्ठ! यदि उनकी किसी प्रकार रक्षा हो सके, तो कृपा करके मुझे बताइए। यदि पूर्वकाल में किसी ने किसी स्त्री की रक्षा की हो, तो कृपा करके वह कथा विस्तारपूर्वक मुझसे कहिए। ॥14॥ |
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| Great one! O lord of the Kuru clan! Best of the Kurus! If they can be protected in any way, then please tell me. If anyone has protected a woman in the past, then please tell me that story in detail. ॥14॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि स्त्रीस्वभावकथने एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें स्त्रियोंके स्वभावका वर्णनविषयक उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३९ ॥
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