श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 41: स्त्रियोंकी रक्षाके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.41.1 
युधिष्ठिर उवाच
इमे वै मानवा लोके स्त्रीषु सज्जन्त्यभीक्ष्णाश:।
मोहेन परमाविष्टा देवसृष्टेन पार्थिव॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - पृथ्वीनाथ! ये संसार के मनुष्य विधाता द्वारा रची हुई महान माया से ग्रस्त हैं और सदैव स्त्रियों में आसक्त रहते हैं॥1॥
 
Yudhishthir said – Prithvinath! These human beings of the world are possessed by the great illusion created by the Creator and are always attached to women. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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