श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.40.9 
तामुवाच स देवर्षि: सत्यं वद सुमध्यमे।
मृषावादे भवेद् दोष: सत्ये दोषो न विद्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषि ने उससे कहा, 'सुमध्यमे! मुझसे सत्य कहो। झूठ बोलने में पाप है। सत्य बोलने में कोई पाप नहीं है।'॥9॥
 
Then the sage said to him, 'Sumadhyame! Tell me the truth. There is a sin in telling a lie. There is no sin in telling the truth.'॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)