श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.40.8 
विदितास्ते स्त्रियो याश्च यादृशाश्च स्वभावत:।
न मामर्हसि देवर्षे नियोक्तुं कार्य ईदृशे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
संसार में स्त्रियों के प्रकार और उनका स्वभाव सब आपको ज्ञात है; इसलिए हे देवमुनि! मुझे ऐसे कार्य में न लगाएँ॥8॥
 
The types of women in the world and their nature are all known to you; therefore, O sage of gods, do not engage me in such work.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)