श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.40.7 
भीष्म उवाच
एतच्छ्रुत्वा वचस्तस्य देवर्षेरप्सरोत्तमा।
प्रत्युवाच न शक्ष्यामि स्त्री सती निन्दितुं स्त्रिय:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - राजन! नारदजी के ये वचन सुनकर उस श्रेष्ठ अप्सरा ने कहा - 'हे ऋषिवर! मैं स्त्री होकर स्त्रियों की निन्दा नहीं कर सकती।
 
Bhishma says - King! On hearing these words of Naradji, that excellent Apsara said - 'O sage! Being a woman, I cannot criticise women.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)