श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.40.6 
नारद उवाच
न त्वामविषये भद्रे नियोक्ष्यामि कथंचन।
स्त्रीणां स्वभावमिच्छामि त्वत्त: श्रोतुं वरानने॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, "भद्र! मैं तुमसे कोई ऐसी बात कहने को नहीं कहूँगा जो बताने योग्य न हो अथवा तुम्हारे विषय से बाहर हो। सुमुखी! मैं तुम्हारे मुख से स्त्रियों के स्वभाव का वर्णन सुनना चाहता हूँ।"
 
Narada said, "Bhadra! I will not ask you to tell me something that is not worth telling or is not your subject. Sumukhi! I want to hear the description of the nature of women from your mouth."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)