श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.40.5 
भीष्म उवाच
एवमुक्ताथ सा विप्रं प्रत्युवाचाथ नारदम्।
विषये सति वक्ष्यामि समर्थं मन्यसे च माम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! नारदजी के ऐसा कहने पर पंचचूड़ा अप्सरा ने उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया - 'यदि आप मुझे उस प्रश्न का उत्तर देने में समर्थ समझते हैं और वह बताने योग्य है, तो मैं अवश्य ही आपको बताऊँगी।'॥5॥
 
Bhishma says - Yudhishthira! When Naradji said this, Panchachuda Apsara replied to him in this way - 'If you consider me capable of answering that question and it is worth telling, then I will definitely tell you.' ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)