श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.40.4 
तां दृष्ट्वा चारुसर्वाङ्गीं पप्रच्छाप्सरसं मुनि:।
संशयो हृदि कश्चिन्मे ब्रूहि तन्मे सुमध्यमे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर अंगों वाली उस अप्सरा को देखकर ऋषि ने उससे प्रश्न किया- 'सुमध्यमे! मेरे हृदय में बड़ा बड़ा संदेह है। उसे तुम मुझसे सच-सच कहो।'॥4॥
 
Seeing that nymph with beautiful body parts, the sage put his question to her- 'Sumadhyame! I have a big doubt in my heart. Tell me the truth about it.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)