श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.40.25 
नाग्निस्तृप्यति काष्ठानां नापगानां महोदधि:।
नान्तक: सर्वभूतानां न पुंसां वामलोचना:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अग्नि ईंधन से कभी तृप्त नहीं होती, समुद्र नदियों से कभी तृप्त नहीं होता, मृत्यु यदि सब प्राणियों को भी एक साथ ले ले, तो भी उनसे कभी तृप्त नहीं होती; इसी प्रकार सुन्दर नेत्रों वाली कन्याएँ पुरुषों से कभी तृप्त नहीं होतीं॥25॥
 
A fire is never satisfied with fuel, the ocean is never satisfied with rivers, even if death gets all the creatures together, it is never satisfied with them; similarly, girls with beautiful eyes are never satisfied with men.॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)