श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.40.22 
यदि पुंसां गतिर्ब्रह्मन् कथंचिन्नोपपद्यते।
अप्यन्योन्यं प्रवर्तन्ते न हि तिष्ठिन्ति भर्तृषु॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! यदि स्त्रियों को पुरुष न मिले और उनके पति भी चले गए हों, तो वे कृत्रिम साधनों से आपस में मैथुन करती हैं। 22॥
 
Brahman! If it is not possible for women to find a man and their husbands have also gone away, then they indulge in sexual intercourse among themselves through artificial means. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)