Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.40.21: महामुनि देवर्षे! जो अपंग हैं या जो अत्यंत घृणित हैं, वे भी स्त्रियों में आसक्त हो जाते हैं। इस संसार में कोई भी पुरुष स्त्रियों के लिए दुर्गम नहीं है। 21॥ | mahabharat अध्याय 13.40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पङ्गुष्वथ च देवर्षे ये चान्ये कुत्सिता नरा:।
स्त्रीणामगम्यो लोकेऽस्मिन् नास्ति कश्चिन्महामुने॥ २१॥
अनुवाद
महामुनि देवर्षे! जो अपंग हैं या जो अत्यंत घृणित हैं, वे भी स्त्रियों में आसक्त हो जाते हैं। इस संसार में कोई भी पुरुष स्त्रियों के लिए दुर्गम नहीं है। 21॥
Mahamuni Devarshe! Those who are crippled or who are extremely disgusting people also get attached to women. No man in this world is inaccessible to women. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥