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mahabharat 13.40.17: उनके लिए कोई भी पुरुष अगम्य नहीं है। वे किसी विशेष अवस्था के बारे में भी निश्चित नहीं हैं। चाहे कोई सुंदर हो या कुरूप, स्त्रियाँ केवल यह जानकर ही उसका आनंद लेती हैं कि वह पुरुष है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 13.40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.40.17 
नासां कश्चिदगम्योऽस्ति नासां वयसि निश्चय:।
विरूपं रूपवन्तं वा पुमानित्येव भुञ्जते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उनके लिए कोई भी पुरुष अगम्य नहीं है। वे किसी विशेष अवस्था के बारे में भी निश्चित नहीं हैं। चाहे कोई सुंदर हो या कुरूप, स्त्रियाँ केवल यह जानकर ही उसका आनंद लेती हैं कि वह पुरुष है॥17॥
 
For them there is no man who is unreachable. They are not even sure of any particular stage. Whether someone is handsome or ugly, women enjoy him just by knowing that he is a man.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)