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mahabharat 13.40.12: स्त्रियों से बढ़कर कोई पापी नहीं है। स्त्रियाँ ही सब बुराइयों की जड़ हैं, यह बात तुम भी भली-भाँति जानते हो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 13.40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.40.12 
न स्त्रीभ्य: किञ्चिदन्यद्वैपापीयस्तरमस्ति वै।
स्त्रियो हि मूलं दोषाणां तथा त्वमपि वेत्थ ह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों से बढ़कर कोई पापी नहीं है। स्त्रियाँ ही सब बुराइयों की जड़ हैं, यह बात तुम भी भली-भाँति जानते हो॥12॥
 
There is no one more sinful than women. Women are the root of all evils, you also know this very well.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)